ऐसे भव्य बनी ‘बाहुबली 2’: फिल्म देखने के बाद भी पता नहीं चलतीं ये 12 बातें

मुंबई/हैदराबाद.भारतीय सिनेमा की अब तक की सबसे चर्चित फिल्मों में से एक बाहुबली के सेट, इसके पात्र, हथियार हर चीज के पीछे एक रोचक बात है। नयापन है। ऐसी कुछ अनसुनी बातें फिल्म में पहले दिन से जुड़े इन चार महत्वपूर्ण लोगों ने भास्कर के रोहिताश्व कृष्ण मिश्रा के साथ साझा की। पढ़िये विशेष रिपोर्ट…
-फिल्म के निर्देशक एसएस राजामौली, निर्माता शोबु यरलागड्डा, आर्ट डायरेक्टर सीबू सिरिल, कहानीकार विजयेंद्र प्रसाद बता रहे हैं ऐसी 12 बातें जो फिल्म देखने पर भी पता नहीं चलेंगी।
1. टिशू पेपर से बनाया 1000 फीट का झरना
हमने फिल्म के दोनों पार्ट में करीब 1000 फीट ऊंचाई से गिरने वाले वाटरफॉल के सीन को टिशू पेपर की मदद से शूट किया गया है। टिशू पेपर को लंबे और मीडियम साइज में काटकर झरने वाले सीन में पानी की तरह मशीन से गिराया गया था। टीम ने मशीन की फिक्व्रेंसी ऐसी सेट की थी कि टिशू पेपर बिना रुकेे लगातार पानी की तरह ही गिरता रहे। ताकि यह एकदम रियल लगे। बर्फ के बुरादे के लिए भी हमने टिशू पेपर का ही इस्तेमाल किया गया था। इसे लोगों ने खूब पसंद किया है।
-झरने की शूटिंग केरल की है। झरने का नीचे का हिस्सा असली है। ऊपर से झरना गिरने का सीन टिशू की मदद से है।
2.पैलेस की नक्काशी राजस्थान के मंदिर की
बाहुबली-2 में बना माहिष्मति किंगडम पैलेस देश में किसी भी फिल्म के लिए बनाया गया अब तक का सबसे ऊंचा पैलेस है। इसके पीछे हमारी सोच थी कि इसमें भव्यता दिखे। इसकी ऊंचाई 300 मीटर है। ये पेरिस के एफिल टॉवर के बराबर है। राजस्थान के 2 मंदिरों पर रिसर्च करने के बाद पैलेस के अंदर की नक्काशी की गई थी। यह काफी बारीक है। इसे बिल्कुल रियल लुक देने के लिए राजस्थान से पेड़, मार्बल और बुल्गारिया से रॉ मटेरियल मंगाया गया था।
-माहिष्मति पैलेस के सेट को बनाने के लिए 1900 लोगों ने 90 से 100 दिन तक लगातार काम किया।
3. धान काटने की मशीन से रथ का आइडिया
पहले भाग में हमने सिंगल ब्लेड का रथ दिखाया था। दूसरे पार्ट के लिए 4 ब्लेड का रथ बनाया। टीम को इसका विचार किसानों की धान काटने की मशीन को देखकर आया था। इसे चलाने के लिए एक लाख रु. की बुलेट खरीदी गई और उसके इंजन को रथ में फिट किया गया था। जिसे बनाने में एक माह का समय लगा था।
4.1500 सैनिक थे, युद्ध में दिखाए सवा लाख
फर्स्ट पार्ट के क्लाइमेक्स सीन में माहिष्मति के 25 हजार सैनिक दुश्मन के 1 लाख सैनिकों से लड़ते दिखाए गए हैं। ये रियल टाइम नहीं था। रियल टाइम में एक समय में 1500 से ज्यादा सैनिकों को शूट करना नामुमकिन था। यही कारण है कि इस सीन में बाकी के 1.24 लाख योद्धाओं को 3डी तकनीक से दिखाया गया। इन नकली सैनिकों को बाद में कंप्यूटर से जोड़ा गया। इसके अलावा भी युद्ध के सभी दृश्यों में हमने अधिकतम 1500 असली सैनिक ही लिए हैं।
-क्लाइमेक्स का यह सीन भारतीय सिनेमा का सबसे बड़ा क्रोमा सीन है। इसमें एल शेप का ग्रीन पर्दा इस्तेमाल हुआ।
5. 100 ट्रक मिट्‌टी डाली फिर बाहुबली मरा
बाहुबली को मारने वाले सीन की शूटिंग चंबल वैली में होनी थी। लेकिन शूट के एक हफ्ते पहले अचानक बारिश होने से वैली में घांस उग आई थी। जबकि, ये सीन प्लेन और बिना हरियाली वाली जगह में शूट करना था। फिर इसे हैदराबाद के आउटर में “क्वेरी’ में शूट किया। यहां ना रोड थी ना पहाड़। रातोरात 100 ट्रक मिट्टी गिरवाकर रोड़ बनवाई गई। 60 फीट ऊंचे नकली पहाड़ बनाकर उस पर लाल कलर का टैक्सचर पेंट किया गया। राजस्थान से पेड़ मंगाकर फाइबर ग्लास की मदद से इन पेड़ों की नकल बनाई गई।
-बाहुबली के मरने वाले सीन का सेट तैयार करने के लिए 45 दिन तक 200 लोगों ने दिन-रात काम किया।
6. हेलीकॉप्टर विंग मैटेरियल से बने हल्के हथियार
इस फिल्म के लिए हमने सांड, घोड़े, सांप आदि सभी जानवर और छोटे-बड़े हथियार हेलीकॉप्टर के विंग को बनाने वाले मैटेरियल कार्बन फाइबर से बनाए गए थे। देश में पहली बार किसी फिल्म में कार्बन फाइबर का इस्तेमाल हुआ है। फौलाद जैसे ताकतवर फाइबर का वजन हल्का होता है। युद्ध के कई दृश्यों में पचासों बार हथियार चलाना था। हथियार चलाने में हाथ दर्द ना हो और वे असली भी लगे, इसी मकसद से हमने कार्बन फाइबर का इस्तेमाल किया है।
-2000 के करीब कारिगारों ने महल, किला और अन्य सैट बनाए। 4 क्रेन सेट एक जगह से दूसरी जगह शिफ्ट करने के लिए खड़ी रहती थीं।
7. 5 साल तक शूटिंग के लिए उठना पड़ा सुबह 3.30 बजे
हम सभी क्रू मेंबर्स रोजाना सुबह 3.30 बजे उठ जाते थे। हमें 4.30 बजे लोकेशन के लिए निकलना होता था। एक घंटे के ट्रैवल के बाद सभी सेट पर पहुंचते थे। कुछ दिनों को छोड़कर बाकी सभी दिन सुबह 6-6:15 पर शूटिंग शुरू हो जाती थी। 5 साल तक हम सभी लोगों ने इसी रूटीन को फॉलो किया था। बाहुबली के दोनों पार्ट की शूटिंग 615 दिन चली थी। काम जुलाई 2013 में शुरू किया गया था और जनवरी 2017 तक चला। हमने विदेशी स्टूडियोज़ की भी मदद ली।
-30 स्टूडियो ने फिल्म में विजुअल इफेक्ट पर काम किया है। 3.5 साल का समय लगा। यूक्रेन, सर्बिया, इरान और चीन के स्टूडियो में काम हुआ।
8. ‘बाहुबली’ और ‘भगवान कृष्ण’ का ये संबंध है
ये पूरी तरह से फिक्शन मूवी है। कोई भी कैरेक्टर रियल स्टोरी से मैच नहीं करता है। हां, ये जरूर है कि मैंने बाहुबली को भगवान कृष्ण की महाभारत से इन्सपायर होकर लिखा है। बिज्जलदेव का कैरेक्टर महाभारत के शकुनि मामा जैसा है। भल्लालदेव दुर्योधन जैसा है, जिसे लगता है उसके साथ गलत हुआ है और हर हाल में साम्राज्य पाना चाहता है। महेंद्र बाहुबली कुछ-कुछ भगवान कृष्ण और भगवान राम की तरह है। कटप्पा रामायण के हनुमान की तरह है।
-चार भाषाओं में फिल्म डब की गई है। तमिल, तेलुगु, मलयालम और हिन्दी में। पार्ट 2 देश के 6500 थियेटरों में लगी है।
9. 2 मिनट के सीन की शूटिंग में लगे 100 दिन
मूवी की स्क्रिप्टिंग के दौरान हमारी सबसे बड़ी डिमांड युद्ध, मार-धाड़, लड़ाई, टेक्नोलॉजी का जबरदस्त इस्तेमाल जैसी चीजें थीं।
प्रभास के रूप में हमने मूवी का एक्टर पहले ही तय कर लिया था। बाद में उसकी पर्सनैलिटी और इन सारी जरूरतों के आधार पर स्क्रिप्टिंग के लिए कहा गया था। हमारे लिए सबसे मुश्किल लास्ट की लड़ाई को शूट करना था। 2 मिनट के सीन की शूटिंग में हमें करीब 100 दिन लग गए थे। इसमें हमने तकनीक का भी बेहतर इस्तेमाल किया है।
-10 करोड़ लोगों ने फिल्म का ट्रेलर इसके जारी हाेने के एक सप्ताह के भीतर देखा। भारत में किसी फिल्म का ट्रेलर पहले कभी इतना नहीं देखा गया।
10. बाहुबली’ के 90% सीन हैं पूरी तरह से नकली
दोनों पार्ट के 90 फीसदी सीन नकली हैं। फिर चाहे वो कटप्पा द्वारा बाहुबली को मारने वाला सीन ही क्यों न हो। फिल्म में दिखे पहाड़ से लेकर जानवर तक सभी के निर्माण में हमने तकनीक के बेहतर इस्तेमाल पर जोर दिया है। इन सीन्स को कम्प्यूटर ग्रॉफिक्स इमेज (सीजीआई) और 3डी की मदद से शूट किया गया है। अगर किसी को असली-नकली सीन्स की पहचान करनी हो तो उसे शूट का एंगल देखना चाहिए। करीब से लिए गए सभी शॉट ओरिजनल हैं।
– 20 से 25 फीट की दूरी से लिए गए सीन ही फिल्म में केवल रियल हैंं। दूर से लिए गए सभी तकनीक और सेट के कमाल से बने हैं।
11. 4 हिस्सों में बना भल्लाल का 400 किलो का स्टैच्यू
माहिष्मति किंगडम में लगे भल्लालदेव के स्टैच्यू का वजन 400 किलो है। इसे करीब 400 लोगों की हमारी टीम ने बनाया है। इसे 4 अलग-अलग हिस्सों में तैयार किया है। जिसमें करीब 1 महीने का समय लगा था। मूवी के क्रू मेंबर्स को भल्लालदेव का स्टैच्यू लगाने का आइडिया ग्रीस के कोलोस्सस ऑफ रोहड्स को देखकर आया था। ग्रीस के इस स्टैच्यू को प्राचीन संसार के 7 अजूबों में से एक माना जाता है।
Baahubali 2, Prabhas, VFX
12. क्रू मेंबर्स ने कहा, ड्रामा लाओ- तो मरा बाहुबली
बाहुबली की शुरुआती स्क्रिप्ट में कटप्पा द्वारा बाहुबली को मारे जाने का प्लान नहीं था। इस सीन की जगह कहानी कुछ और ही थी। लेकिन जब मूवी क्रू ने फिल्म में ड्रामा ऐड करने को कहा, उसके बाद ये सीन मैंने सबसे आखिरी में जोड़ा। अगर हमारी टीम द्वारा ड्रामे की डिमांड ना होती तो शायद ये सवाल वायरल ना हो पाता कि कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा…? आज ये मूवी की जान है। हमें उस समय यह उम्मीद नहीं थी कि यह इतना हिट हो जाएगा।
-30 थियेटर विदेश के भी बाहुबली 2 को रिलिज करेंगे। बाहुबली ऐसी फिल्म है जिसमें इसके कलाकारों से ज्यादा चर्चा इसके निर्देशक की है।
Source : dainikbhaskar.com
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